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सोना बनाने का रासायनिक तरीका( Chemical Method of Making Gold)

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मगध देश का एक राजा था। उसका नाम था चित्रांगद । वह अपनी प्रजा के सुख-दुःखों का पता लगाने के लिए राज्य भर में भ्रमण करने निकला। पुराने जमाने में यात्रा के आज जैसे साधन न थे। रेल और मोटरें थी नहीं, पक्की सड़कें भी कम थीं। दूर देश जाने के लिए घने जंगलों को पार करना पड़ता था। राजा अपनी यात्रा करते हुए एक बड़े जंगल से होते हुए निकले। दिनभर की यात्रा से सब लोग थक गये थे। वे कहीं विश्राम करने की फिक्र में ही थे कि सामने एक सुन्दर सरोवर दिखाई दी। चारों ओर हरियाली थी, सुन्दर पुष्प खिले हुए थे, पक्षियों के कलरव से वह स्थान बड़ा शोभायमान हो रहा था। इस रमणीक स्थान को देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुए और रात को वहीं डेरा डाल देने का हुक्म दे दिया। सब लोग अपनी थकावट मिटाने लगे। पास में कुटी दिखाई दी। राजा ने नौकरों को पता लगाने भेजा— "देखो तो इस कुटी में कौन रहता है ?" नौकर वहाँ पहुँचे। देखा कि एक महात्मा भगवान का भजन कर रहे हैं। नौकरों ने जो देखा था राजा को बता दिया। राजा ने सोचा इस एकान्त वन में भजन करने वाला साधु निश्चय ही धनाभाव के कारण कष्ट उठाता रहता होगा। हम आज इसके आश्रम में आये हैं, राजा...

जब आया एक अनोखा विश्वास (When a strange belief came)

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नदी घड़ियालों से भरी थी , आकाश मच्छरों से , तटीय प्रदेश लम्बी घासों से , जिनमें विषैले सर्पों की गणना नहीं। वन में शेर , तेंदुएँ , चीते। पेड़ों पर भी शरण लेना मुश्किल था। वहाँ भी साँप और तेंदुएँ छलाँग लगा सकते थे। उसने सोचा भी नहीं था कि जर्मनी के इस इलाके में उसे रात बितानी पड़ेगी। सूरज डूबने के पहले वे लौट जाएँगे ऐसा उसका विचार था। लेकिन सूरज कब के पश्चिम में पहुँच चुके और अभी पता नहीं वह कहाँ है ? कितनी दूर है यहाँ से उसका शिविर ? किसी भी नक्शे में इधर की नदी के मोड़ों एवं उसकी धाराओं का स्पष्ट अंकन नहीं है। दलदल से भरे इस इलाके में आने का साहस कितनों को है। जब सुबह वह चला था , सबने रोका था उसे एक अनजाने प्रदेश में केवल अनुमान के भरोसे जाना ठीक नहीं , यह चेतावनी उसे न जाने कितनी बार मिली थी , पर वह शिकारी कैसा जो डर जाए ? सिर्फ एक मल्लाह तैयार हुआ था साथ चलने को , वह मल्लाह इस ओर एक बार आ चुका था। आया वह भी था दुर्घट...